कोविड-19 के कारण पत्रकारों की मौत के मामले में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में भारत शामिल है। जिनेवा स्थित एक मीडिया अधिकार निकाय “द प्रेस एंब्लेम कैंपेन” ने बताया कि कोविड-19 संबंधी दिक्कतों के कारण भारत में रोजाना कम से कम तीन पत्रकारों की मौत हो रही है।
26 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कम से कम 107 पत्रकारों की मौत
हो चुकी है और इस तरह से भारत केवल ब्राजील (181 मौतें) और पेरू (140 मौतें) से पीछे
है। केवल पिछले दो हफ्ते में भारत के 45 पत्रकारों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट जारी किए जाने के बाद से सात और पत्रकारों
की मौत हो चुकी है, जिससे यह आंकड़ा
114 तक पहुंच जाता है। मार्च 2020 से अब तक 76 देशों में कोविड-19 पॉजिटिव होने के
बाद 1184 पत्रकारों की मौत हुई है।
रिपोर्ट में ओडिशा के अमजद बादशाह, त्रिपुरा के तन्मय चक्रबर्ती, महाराष्ट्र के विवेक
बेंद्रे, सचिन शिंदे, जयराम सावंत और सुखनंदन गवई, बिहार के रामप्रकाश गुप्ता, उत्तर प्रदेश के
रोहिताश गुप्ता और आंध्र प्रदेश के रमजान अली की मौत का उल्लेख किया गया है। द प्रेस
एंब्लेम कैंपेन की लेखिका नवा ठाकुरिया ने कहा कि मीडिया के भीतर मृतकों की वास्तविक
संख्या अधिक हो सकती है क्योंकि स्थापित मीडिया हाउसों ने प्रभावितों की वास्तविक संख्या
की सूचना नहीं दी थी।
द प्रेस एंब्लेम कैंपेन ने दुनियाभर के उन पत्रकारों का भी डेटाबेस तैयार किया है, जिनकी मृत्यु कोविड-19 पॉजिटिव होने के बाद हुई है। इस डेटाबेस में पत्रकारों का नाम, उम्र और अन्य जानकारियां हैं। 28 अप्रैल को ही छह पत्रकारों की मौत दर्ज की गई। ये पत्रकार जयपुर के अनिल बसनोई, हैदराबाद के श्रीधर धर्मसनम, गाजियाबाद के राजू मिश्रा, ग्वालियर के आकाश सक्सेना और मनचेरियल के कोंड्रा श्रीनिवास गौड़ और सम्मी रेड्डी थे। वहीं, 27 अप्रैल को मुंबई के सदानंद शिंदे की मौत हो गई थी।
