लेखक - मनोज श्राीवास्तव manojshriv@gmail.com
प्रस्तुत लेख श्रृंखला मेरे सवालों और राम मिश्रा भैय्या के जवाबों पर आधारित है।
भाग
- 2 का सारांश... देव साहब पूछते हैं - कहां से आये हो? राम मिश्रा कहते
हैं - फ्रॉम झांसी सर, वहां आपकी फिल्म ‘‘लव मैरिज‘‘ की शूटिंग भी हुई थी।
‘‘ओ यस, आई रिमेम्बर झांसी, ब्यूटीफुल सिटी, माई कर्नल ब्रदर-इन-लॉ वाज
पोस्टेड देयर‘‘ - ऐसा कहते हुए देव साहब झांसी से जुड़ी अतीत की यादों में
खो जाते हैं।
थोड़ी
देर बाद देव साहब अतीत से वापस लौट आते हैं और राम मिश्रा से पूछते हैं -
व्हाट यू वांट नाउ? राम मिश्रा - मैं आपके साथ काम करना चाहता हूं। देव
साहब हँसते हुए - अभी मेरी कोई फिल्म फ्लोर पर नहीं है। हाँ! गोल्डी (विजय
आनंद) से मिल सकते हो, उसकी फिल्म ‘‘तेरे मेरे सपने‘‘ फ्लोर पर है। राम
मिश्रा - क्या मैं उनको आपका रेफ्रेन्स दे सकता हूं। देव साहब - व्हाई नॉट,
यू कैन टेल हिम दैट यू मेट मी। राम मिश्रा देव साहब से हाथ मिलाकर थैंक
यूं सर बोलते हुए उनके चैम्बर से बाहर जाते हैं।
गौरतलब
है कि इस फिल्म की अधिकांश शूटिंग जिला छिंदवाड़ा, म.प्र. की तहसील परासिया
के अंतर्गत आने वाले न्यूटन चिखली गांव में हुई थी। फिल्म में दिखाया गया
वह गेट आज भी क्षतिग्रस्त अवस्था में मौजूद है। फिल्म शूटिंग के आखिरी दौर
में मुमताज जी ने न्यूटन चिखली गांव के वासियों से वादा किया था कि आपका
प्यार देखकर मैं एक बार फिर यहाँ आप के बीच आउँगी, पर वह न आ सकीं, तो क्या
हुआ, आज भी यहाँ के लोगों के दिलों में मुमताज जी रहती हैं।
अब
इत्तेफाक देखिये, इधर राम मिश्रा देव साहब के चैम्बर से बाहर निकल रहे हैं
और उधर सामने से विजय आनंद ‘गोल्डी‘ और उनके पीछे असिस्टेंट प्रेमप्रकाश
चले आ रहे हैं। गोल्डी साहब अपना चश्मा ठीक करते हुए देव साहब के चैम्बर से
बाहर निकले नए रंगरूट राम मिश्रा की ओर देखते हैं। प्रेमप्रकाश तेजी से
आगे आ कर गोल्डी साहब से कहते हैं - सर ये मिश्रा है, मैं कम्पाउंडर के रोल
के लिए इसी को सजेस्ट कर रहा था। गोल्डी राम मिश्रा से - पहले कुछ किया
है? राम मिश्रा - जी नहीं। गोल्डी - परसों सुबह 9 बजे महबूब स्टूडियो आओ।
राम
मिश्रा सुबह 8.30 बजे ही महबूब स्टूडियो पहुँच जाते हैं। वहां सैट नंबर 1
पर फिल्म ‘‘तेरे मेरे सपने’’ में देव साहब और मुमताज पर फिल्माये जाने वाले
गीत ’’जैसे राधा ने माला जपी श्याम की’’ की शूटिंग की तैयारी चल रही थी।
राम मिश्रा ने गोल्डी साहब को गुडमाॅर्निंग कहा, उन्होंने कोई जवाब नहीं
दिया। लगभग 3 घंटे बाद फिर आमना-सामना होने पर राम मिश्रा ने गोल्डी साहब
को फिर गुडमाॅर्निंग कहा, उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। सैट पर ही लंच का
इंतजाम था, लंच टाईम होने पर प्रेमप्रकाश ने राम मिश्रा को लंच कर के आने
को कहा। लंच के वाद राम मिश्रा गोल्डी साहब के पीछे आकर खडे़ हो गये, तभी
स्पाॅट बाॅय चाय लेकर आया। राम मिश्रा ने चाय का एक कप साइड से गोल्डी साहब
की ओर बढ़ाते हुए कहा- सर चाय। गोल्डी साहब ने गर्दन घुमाते हुए चाय का कप
लिया और राम मिश्रा को पहचानते हुए कहा- अच्छा तो ये तुम हो। उन्होंने
प्रेमप्रकाश से कहा- इसके लिये शूटिंग की डेªस बनवाओ।
दूसरे
दिन प्रेमप्रकाश राम मिश्रा को लेकर माहिम में स्थित चेलाराम ड्रेस वाले
की दुकान जाकर नाप दिलाते हैं और गोल्डी साहब के निर्देश के अनुसार टोपी भी
बनाने को कहते हैं। इसके बाद वो दोनों वापस सैट पर जाते हैं। राम मिश्रा
को कम्पाउंडर के द्वारा टोपी लगाने की बात कुछ गले से नीचे नहीं उतरती है।
पीछे खडे़ हुए गोल्डी साहब से अनजान राम मिश्रा प्रेमप्रकाश से कहते हैं-
एक बात समझ नहीं आई, कम्पाउंडर क्यों टोपी लगायेगा! पीछे से गोल्डी साहब की
आवाज आई- हां यार तेरे बाल खराब हो जायेगें, मत लगाना टोपी, जेब में रख
लेना। इतना सुनते ही राम मिश्रा को जैसे सांप सूंघ जाता है, वो घबराकर
गोल्डी साहब से कहते हैं- साॅरी सर, साॅरी सर। गोल्डी साहब कहते हैं- इट्स
ओके।
तीन
दिन बाद गाने की शूटिंग होनी थी। राम मिश्रा टैक्सी से स्टूडियो के लिये
रवाना होते हैं, पैसे कम होने के कारण थोड़ा पहले उतर कर पैदल जाते हैं, तभी
तेज बारिश में पूरा भीग जाते हैं। स्टूडियो के गेट पर खड़ा दरबान ‘‘पठान’’
राम मिश्रा को रोकते हुए कहता है- कहां जाता है, क्या काम है। राम मिश्रा-
शूटिंग में जाता है। पठान- इधर कोई शूटिंग नहीं। राम मिश्रा- है बाबा,
गोल्डी साहब की फिलम का सैट नंबर 1 में। पठान प्रेमप्रकाश से फोन पर बात
करने के बाद राम मिश्रा को अंदर जाने देता है।
राम
मिश्रा को भीगा देख कर प्रेमप्रकाश शूटिंग की ड्रेस पहनने और मेकअप करवाने
को कहते हैं। राम मिश्रा ड्रेस पहनकर सीधे देव साहब के पर्सनल सीनियर
मेकअप मैन हरिराम शर्मा के पास पहंुच जाते हैं। हरिराम शर्मा- मेरे पास
किसने भेजा। राम मिश्रा- प्रेमप्रकाश जी ने मेकअप करवाने के लिये कहा था तो
मैं आ गया। हरिराम शर्मा- राम मिश्रा को अपने साथ लेकर प्रेमप्रकाश के पास
पहुंचते हैं, सारी बात सुनकर प्रेमप्रकाश उन्हें साॅरी कहते हैं और राम
मिश्रा को सहायक अभिनेताओं के मेकअप मैन के पास भेजते हैं। शूटिंग में थोड़ी
देर है, ड्रेस और मेकअप के साथ राम मिश्रा इधर-उधर घूमते हैं और उमस के
कारण बेखयाली में रूमाल से चेहरा पोछ लेते हैं, मेकअप के रंग चेहरे पर फैल
जाते हैं। लोग उन्हें देख कर हंसने लगते हैं, उनका मेकअप फिर ठीक किया जाता
है।
शूटिंग
शूरू होने वाली है, देव साहब मौजूद हैं, उन्हें राम मिश्रा दिखाई देते
हैं, राम मिश्रा को देव साहब की नजरों में मित्रता और अपनेपन की झलक दिखाई
देती है। रिहर्सल में देव साहब के साथ राम मिश्रा ठीक अभिनय करते हैं
परन्तु शाॅट लेते समय राम मिश्रा दो बार गलती कर बैठते हैं। सिनेमाटोग्राफर
(चलचित्र कार) वी.रात्रा ऊंची आवाज में राम मिश्रा से कहते हैं- ये क्या
है, बार-बार गलती। देव साहब- रात्रा, नो शाउटिंग। यहां यह बहुत गौर करने
वाली बात है कि देव साहब हमेशा अपने सह कलाकारों और खासकर नये कलाकारों के
साथ बहुत नरमदिली से पेश आते थे और इसलिये जब कभी किसी ने उनके साथ काम
किया तो वह उनका मुरीद हो गया। शूटिंग के बाद राम मिश्रा देव साहब के पैर
छूने लगते हैं तो देव साहब कहते हैं- नो नो, आई डोन्ट लाइक दिस।
राम
मिश्रा प्रेमप्रकाश से 50 रूपये उधार लेकर स्पाॅट बाॅय से सभी के लिये
लड्डू मंगवाते हैं। स्पाॅट बाॅय शायद जानबूझ कर बहुत हार्ड लड्डू ले आता
है। लड्डू लेने के बाद सिनेमाटोग्राफर (चलचित्र कार) वी.रात्रा राम मिश्रा
से कहते हैं- हथौड़ी है। राम मिश्रा दौड़ कर हथौड़ी ले आते हैं, तब वी. रात्रा
कहते हैं- यह हथौड़ी लड्डू तोड़ने के लिये है। राम मिश्रा थोड़ा झेंपते हैं
पर पूरे सैट में हंसी की लहर दौड़ जाती है।
