भारत में अब तक क़रीब दो करोड़ लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं, जिनमें से शायद आपके भी कुछ अपने होंगे, जो कोरोना को हरा चुके हों। ये बात देखने में आ रही है कि कोरोना से ठीक होने के बाद कई लोग अब दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं। किसी को हल्के-फुल्के काम के बाद थकान हो जाती है, तो किसी को साँस लेने में शिकायत, किसी को दिल का रोग लग जाता है, तो किसी को दूसरी अन्य परेशानियाँ झेलनी पड़ रही हैं।
डॉक्टरों की मानें, तो पोस्ट कोविड केयर भी उतना ही ज़रूरी है, जितना कोविड केयर। मरीज ने जितना ख़्याल कोविड19 में अपना रखा, बीमारी से ठीक होने के बाद भी कुछ हफ़्तों या महीनों तक अपना उतनी ही सतर्कता से
ख़्याल ररखना चाहिए। नहीं तो ऐसा ना हो हो कि छोटी सी लापरवाही
भारी पड़ जाए।
कोविड19 की बीमारी में दिल, दिमाग, मांसपेशियाँ, धमनियाँ और नसों, खून, आँखों जैसे शरीर के कई दूसरे अंग पर भी असर पड़ सकता है। यही वजह है कि हार्ट अटैक, डिप्रेशन, थकान, बदन दर्द, ब्लड क्लॉटिंग और ब्लैक फंगस जैसी दिक़्क़तों
का सामना कोरोना से उबरे मरीज कर रहे हैं। अतः उपयुक्त होगा कि कोविड19 से ठीक होने के बाद भी शरीर के दूसरे अंगों में होने वाले बदलाव को हल्के में
नज़रअंदाज़ ना किया जाए, बल्कि ज़्यादा वक़्त
तक बदलाव उपस्थित रहने पर डॉक्टरों की सलाह ज़रूर ली जाए।
दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉक्टर देश दीपक भी इन दिनों कोविड19 के मरीज़ों के उपचार में लगे हैं। उन्होंने कहा- "गंभीर मरीज़ जो कोविड19 से ठीक हो कर घर लौटें हैं, उनके सबके लिए एक गाइडलाइन नहीं हो सकती। इसे मरीज़ के इम्यून रेस्पांस और केस-टू-केस बेसिस पर ही देखा जाना चाहिए।" गंभीर लक्षण वाले मरीज़ को पूरी तरह से ठीक होने में तीन महीने तक का वक़्त लग सकता है। जो ज़्यादा दिन अस्पताल में रह कर लौटे हैं, उनकी रिकवरी औरों के मुक़ाबले थोड़ी धीमी हो सकती है। ऐसे लोगों को ठीक होने के बाद ब्रीदिंग एक्सरसाइज, प्राणायाम से दिन की शुरुआत करनी चाहिए।
