जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल जगमोहन का निधन

अविभाजित जम्मू कश्मीर के गवर्नर रहे जगमोहन मलहोत्रा का सोमवार रात निधन हो गया उनके देहांत की सूचना उनके परिवार ने उनके ही ट्विटर हैंडल पर दी है

 


1927 में अविभाजित भारत के हाफ़िज़ाबाद (फिलहाल पाकिस्तान में है) में जन्मे जगमोहन दिल्ली के एलजी रह चुके हैं। जगमोहन नाम से जाने जाने वाले जगमोहन मलहोत्रा को आपातकाल के दौरान उन्हें राजधानी के सौंदर्यीकरण का काम सौंपा गया था। वो कुछ वक्त के लिए गोवा, दमन ओर दीव के भी राज्यपाल रहे। अपने राजनीतिक करियर के दौरान वो 1999 अक्तूबर में शहरी विकास मंत्री, 1999 नवंबर में पर्यटन मंत्री और 2001 में पर्यटन और संस्कृति मंत्री रहे। उन्हें 1991 में पद्मश्री, 1977 में पद्म भूषण और 2016 में पद्म विभूषण सम्मान से नवाज़ा गया था।

 

जम्मू-कश्मीर में बतौर राज्यपाल जगमोहन की छवि एक सख्त प्रशासक की बनी। 1990 में जब वो दूसरी बार जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल बनाए गए, तब वहां आतंकवाद जोर पकड़ रहा था और कश्मीरी पंडितों का पलायन शुरू हो चुका था। तब उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ कड़े ऐक्शन का हुक्म दिया। वो आर्टिकल 370 को जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद की जड़ मानते थे। वो कहा करते थे कि आर्टिकल 370 जम्मू-कश्मीर के संभ्रांत वर्ग को फायदा पहुंचाता है, जबकि इसकी आड़ में गरीब तबके का हक मारा जाता है।

 

जगमोहन का जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के रूप में पहला कार्यकाल 1984 से 1989 के बीच रहा था। 1989 में ही देश के तत्कालीन गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद का आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया था। तब जगमोहन के दोबारा वहां का गवर्नर बनाया गया। उन्होंने सुरक्षा बलों को घर-घर तलाशी लेने का आदेश दे दिया। इससे खफा तत्कालीन मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला ने पद से इस्तीफा दे दिया और राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया।

 

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