कोरोना वायरस की महामारी
आने से पहले भी भारत में किसानों की आमदनी बहुत कम थी। भारत में रूरल बैंकिंग की रेगुलेटरी
एजेंसी नाबार्ड की तरफ़ से साल 2016-17 में कराए गए ऑल इंडिया रूरल फिनांशियल इन्क्लूजन
सर्वे में ये पाया गया था कि किसान परिवारों की हर महीने औसत आमदनी 8931 रुपए है और
इसका करीब 50 फ़ीसदी हिस्सा मज़दूरी और सरकार या किसी और का कुछ काम करके मिलता है।
कोरोना वायरस के संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण किसानों
की आमदनी का ये हिस्सा बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।
महाराष्ट्र में कोरोना
वायरस के बढ़ते मामलों से किसानों की परेशानी भी बढ़ी है। कई जगहों पर बाज़ार बंद हैं,
कोई खरीदार नहीं आ रहा है, जिसके दाम कम हो गए हैं। किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहा
है। कई किसान तो अपने खेतों में ही उपज को फेंक रहे हैं।
औरंगाबाद के पैठण तालुका
में फूलों की खेती करने वाले मनोज गोज़रे आजकल अपने फूलों को तोड़कर अपने ही खेतों में
फेंक रहे हैं। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शुरू होने के बाद सरकार की ओर से कई कठोर
नियम बनाए गए और उसका सीधा असर मनोज गोज़रे जैसे कई किसानों की पर पड़ा है। बाज़ार में
कोई खरीदार नहीं आ रहा है, जिसकी वजह से फूलों के दाम बुरी तरह प्रभावित हैं। पहले जहां एक गुलाब 10 रुपये
में बिकता था, तो
वहीं अब 10 गुलाबों का एक गुच्छा 3 रुपये में बिक रहा है। बाज़ार में लाने और ले जाने
का खर्च भी इन्हीं किसानों को उठाना पड़ता है। यही हाल गेंदे के फूल का भी है। तरबूज
की खेती का भी हाल यही है। आमतौर पर जहां एक किलो तरबूज 8 रुपये में बिकता था,
तो वहीं अब 3 रुपये में भी कोई नहीं खरीद रहा है।
- विकाश मारन, कृषक संवाददाता, भोपाल।
