केंद्र सरकार की पॉजिटिविटी मुहिम पर राहुल गांधी और प्रशांत किशोर का निशाना


केंद्र सरकार की ओर से कोरोना संकट के बीच 'पॉजिटिविटी' मुहिम शुरू किए जाने को लेकर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने निशाना साधा है। प्रशांत किशोर ने अपने ट्वीट में इसे 'घिनौना' बताते हुए प्रॉपेगैंडा फैलाने के लिए सरकार का साधन करार दिया है। दो मई को पांच विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद पहली बार प्रशांत किशोर ने सोशल मीडिया पर कुछ लिखा है।

 

प्रशांत किशोर ने ट्वीट किया है, 'ऐसे वक्त में जब हर कोई शोक मना रहा है और आए दिन हमारे चारों ओर त्रासदियां घट रही हैं, ऐसे में सकारात्मकता के नाम पर झूठ और प्रोपेगैंडा फैलाना घिनौना काम है। पॉजिटिव रहने के लिए हमें अंधा होकर सरकार का प्रोपेगैंडा फैलाने वाला नहीं बनना चाहिए।'

 

सरकार ने कुछ दिन पहले अधिकारियों के लिए एक वर्कशॉप का आयोजन किया था। इस वर्कशॉप का मकसद अधिकारियों को यह सिखाना था कि कैसे महामारी के समय में भी सरकार की छवि को सकारात्मक बनाया जाए। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा पॉजिटिव कहानियां जनता के बीच ले जाने को कहा गया। सरकार ने पहली बार इस तरह की कोई वर्कशॉप आयोजित की थी और करीब 300 अधिकारियों ने इसमें हिस्सा लिया था।

 

इन ख़बरों के बीच कि मोदी सरकार और बीजेपी सकारात्मक बातें करने पर जोर देंगे, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने मोदी सरकार को घेर लिया है।

 

राहुल ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा, “सकारात्मक सोच की झूठी तसल्ली स्वास्थ्य कर्मचारियों व उन परिवारों के साथ मज़ाक़ है, जिन्होंने अपनों को खोया है और ऑक्सीजन-अस्पताल-दवा की कमी झेल रहे हैं।राहुल गांधी ने आगे कहा कि रेत में सिर डालना सकारात्मक नहीं, देशवासियों के साथ धोखा है।

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