मन की बात तो जनता भी कहना चाहती है...


 कभी-कभी जनता के मन की बात भी सुननी चाहिये। जनता के मन की कुछ ऐसी 5 बातें:

 

1. किसी मरीज के लिए किसी ऐसी दवा या इंजेक्शन की जरूरत हो, हॉस्पिटल की दवा दुकान पर ना मिले तो ये कहाँ और कैसे मिलेंगी? इस बात की जानकारी हॉस्पिटल के सूचना पटल पर क्यों नहीं होती है?

 

2. यदि किसी मरीज के लिए ऐसी शॉर्टेज वाली दवा या इंजेक्शन येन-केन-प्रकारेण मिल जाते हैं, तो मरीज को देने से पहले इस बात की जांच की क्या व्यवस्था है कि ये नकली तो नहीं हैं?

 

3. लॉकडाउन के समय में प्रवासी और दिहाड़ी मजदूरों और उनके परिवार का गुजारा कैसे होगा? और खासकर उस समय, जब ऐसा कोई मजदूर कोरोना संक्रमण के उपचार के लिए हॉस्पिटल में भर्ती हो?

 

4. लॉकडाउन के समय आमजन अपनी रोजमर्रा की ज़रुरत की चीजें कब, कैसे और कहाँ खरीद सकते हैं?

 

5. कोरोना महामारी, लॉकडाउन और बेरोजगारी के दौर में आसमान छूती महंगाई पर रोक लगाना जरूरी है या नहीं? यदि हाँ, तो फिर इसके लिए कार्रवाई क्यों नहीं?

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