मध्यप्रदेश देश का बड़ा सौर ऊर्जा केन्द्र बन रहा है

वर्तमान में विश्व का अधिकांश विकास विद्युत पर निर्भर है। परंपरागत विद्युत उत्पादन पर्यावरण के लिये नुकसानदायक तो है ही, साथ ही जिन जीवाश्म ईंधन भण्डारों को बनने में लाखों साल लग जाते हैं, निरंतर दोहन से उनके भी समाप्त होने का खतरा उत्पन्न होता जा रहा है। ऐसे में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा बेहतर विकल्प के रूप में सामने आई है।

 

 

मध्यप्रदेश ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में पिछले डेढ़ दशक में तेज छलांग लगायी है। प्रदेश में एशिया की सबसे बड़ी 750 मेगावाट और 4000 करोड़ लागत की रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना में उत्पादन शुरू हो चुका है। वहीं विश्व की सबसे बड़ी 600 मेगावाट की ओंकारेश्वर सोलर फ्लोटिंग परियोजना का निर्माण प्रस्तावित है। परियोजना के लिये लगभग 2 हजार हेक्टेयर जल क्षेत्र चिन्हांकित कर लिया गया है। वर्ल्ड बैंक द्वारा इसका सर्वे कार्य किया जा रहा है। इसके वर्ष 2023 तक पूरा होने की संभावना है।

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