साक्षात्कार - भोजपुरी फिल्मों के सफल लेखक व निर्देशक “प्रमोद शास्त्री” के साथ


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मुंबई से संजय भूषण पटियाला, ईमेल: sanjaybhushanpro@gmail.com

 

रब्बा इश्क ना होवे, छलिया, प्यार तो होना ही था, जैसी बड़ी और हिट फिल्में देने वाले लेखक-निर्देशक प्रमोद शास्त्री लेकर आ रहे हैं बिग बजट मल्टी स्टारर धमाकेदार  फिल्म "आन बान शान"प्रस्तुत है लेखक-निर्देशक प्रमोद शास्त्री से बातचीत के कुछ अंश:

 

प्र०1- प्रमोद जी, आप हमें अपनी पूरी पारिवारिक पृष्टभूमि से अवगत कराएं..?

उत्तर मेरा पूरा नाम प्रमोद कुमार पांडेय है, मैं मूलतः उत्तर प्रदेश राज्य के प्रतापगढ़ जिले का मूल निवासी हूँ। मेरी पढाई प्रतापगढ़ एवं लखनऊ में हुई है,  मैंने स्नातकोतर तक की पढाई की है, लेकिन शास्त्री की डिग्री लेने के बाद मैं प्रमोद शास्त्री के रूप में जाना जाने लगा। हम दो भाई हैं और हमारी पांच बहनें हैं, जिसमे मेरा स्थान छठा है। हमारे पिताजी एक साधारण किसान हैं और मां एक सीधी-सादी घरेलू महिला हैं।

 

प्र०2- प्रमोद जी, जहाँ आज का युवा फिल्मों में नायक बनना चाहता है, वहीं आपने निर्देशक बनना चाहा, इसकी प्रेरणा आपको किनसे मिली..?

उत्तर मैं अपनी पढाई के दौरान ही लेखन करने लगा था। मेरे दादा जी वैद्य पंडित श्री नारायण शास्त्री बहुत ही विद्वान व्यक्ति थे, उनकी लेखन में गहरी पकड़ थी और उनका व्यापक प्रभाव मेरे ऊपर पड़ा, मेरी पढ़ाई के दौरान ही मेरे द्वारा लिखे गए कुछ नाटक काफी पापुलर हुए, जिनमें से प्रमुख नाटक हैं सम्राट अशोक का शस्त्र परित्याग, राखी की मर्यादा। इस प्रकार मुझे प्रारंभिक जीवन ही यश प्राप्त करने की अभिलाषा बढ़ गयी, लेकिन निर्देशक बनने की तरफ मेरा ध्यान कुछ प्रमुख हिंदी फिल्मों के निर्देशकों के इंटरव्यू सुनने के बाद आया, जिनमें से प्रमुख नाम सुभाष घई, प्रकाश मेहरा और राकेश कुमार जी के हैं, मसलन मैं इन सभी निर्देशकों से बहुत प्रभावित हुआ और एक सफल निर्देशक बनने की ओर अपना कदम बढ़ाया और आज मैं जो कुछ भी हूँ, आप सभी के सामने हूँ।

 

प्र०-3 प्रमोद जी, आप प्रथम बार मुंबई अपने सपने को साकार करने के लिए कब आए.? और आपको प्रथम बार काम करने का अवसर किसके माध्यम से मिला.?

उत्तर जी, मैं मुंबई प्रथम बार सन् 2001 में आया, मुझे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर अदाकारा प्रियंका चोपड़ा जी के मेकअप मैन सुभाष जी का काफी सहयोग मिला, सुभाष जी ने मुझे प्रथम बार सहायक निर्देशक के रूप में काम दिलवाया, इसके बाद मैंने अलग-अलग छः भाषाओ में लगभग सोलह फ़िल्में सहायक लेखक व सह-निर्देशक के रूप में कीं, जिसमें तारीख द फाइनल डे, इक जिंद एक जान एवं भूमिपुत्र प्रमुख हैं।

 

 

प्र०4- प्रमोद जी, निर्देशक के रूप में आपकी प्रथम भोजपुरी फिल्म कौन सी है.? साथ ही यह कब रिलीज़ हुई.? इस फिल्म के निर्माता, नायक और नायिका कौन हैं..?

उत्तर मैंने सर्वप्रथम सन् 2017 में रब्बा इश्क न होबे नामक भोजपुरी फिल्म को निर्देशित किया, इस फिल्म की निर्मात्री कनक यादव हैं, प्रस्तुतकर्ता गौतम सिंह और नायक अरविन्द अकेला कल्लू तथा नायिका कनक यादव और रितू सिंह हैं, इस फिल्म में भोजपुरी फिल्मों के महान कलाकार अवधेश मिश्रा और मनोज टाइगर ने काफी महत्वपूर्ण रोल निभाया है।

 

प्र०5- प्रमोद जी अभी तक आपने कितनी भोजपुरी फिल्मों को निर्देशित किया है, कुछ फिल्मों का नाम बताएं..?

उत्तर अभी तक मेरे द्वारा निर्देशित तीन भोजपुरी फिल्में रिलीज हो चुकी हैं- 1.रब्बा इश्क न होबे (सन2017) 2.छलिया (सन2019) 3.प्यार तो होना ही था (2020), जो दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रही हैं।

 

प्र०6- प्रमोद जी, अब आगे रिलीज़ होने वाली कुछ फिल्मों का भी नाम बताएं, जो रुपहले पर्दे की शोभा बढ़ाने वाली हैं।

उत्तर फ़िलहाल मेरे द्वारा निर्देशित भोजपुरी फिल्म आन बान शान रिलीज होने वाली है, जो बनकर लगभग तैयार है, उसके बाद साम दाम दंड भेद आएगी, जिसकी शूटिंग की तैयारियां चल रही हैं। गौरतलब है कि अब तक मेरे द्वारा बनाई गई लगभग सभी फिल्मों के लेखक मेरे साथ साथ श्री एस. के. चौहान जी हैं, इन दोनों फिल्मों से हमें काफी उम्मीदें हैं। इसके लावा निर्माता गौतम सिंह की एक बड़े बजट की हिंदी फिल्म आएगी, जिसका लेखन कार्य अभी चल रहा है।

 

प्र०7- प्रमोद जी, आपके पसंदीदा नायक कौन हैं, जिसके साथ आप बारबार काम करना चाहेंगे?

उत्तर मेरी हर फिल्म में मेरे पसंदीदा नायक और नायिका बदलते रहते हैं, जो कलाकार अपने करैक्टर में पूरी तरह से फिट हो जाता है और अपना रोल बख़ूबी निभाता है, वही मेरा पसंदीदा कलाकार बन जाता है। अतः यह कहना कि कोई मेरा आलटाइम फेवरेट कलाकार है, अतिश्योक्ति होगी..

 

प्र०8- प्रमोद जी, मैंने सुना है कि आपने टेलीविज़न सीरियल का भी निर्माण किया हैं, इस पर आप कुछ प्रकाश डालें।

उत्तर जी, आपने ठीक सुना है। मैंने 2019-20 में डीडी. किसान चैनल के लिए किसके रोके रुका है सवेरा नामक सीरियल का निर्माण किया, इस सीरियल का मूल उद्देश्य देश के किसानों के मौलिक अधिकारों तथा उनकी समस्याओं के निदान और भारत सरकार द्वारा उनके लिए चलाई गई नई स्कीमों के बारे में जानकारी देना था, जो बहुत ही पापुलर हुआ। मैं इस सीरियल का लेखक और निर्देशक भी हूँ।

 

प्र०9- प्रमोद जी, आप अपनी फिल्मों के निर्माण के समय नए कलाकारों को मौका देतें हैं या नहीं, इस बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?

उत्तर मैं अपनी हर फिल्म में किसी ना किसी रूप में हर बार तीन से चार नए प्रतिभावान कलाकारों तथा टेक्निशियनों मौका देता हूँ। उदाहरण के तौर पर आप मेरे द्वारा बनाई गई कोई भी फिल्म अथवा सीरियल देख सकते हैं, जिसमें आपको कई अच्छे और बड़े रोल में नये कलाकार या टेक्निशियन का नाम अवश्य दिखेगा, इतना ही नहीं, उन्हें भविष्य का स्टार बनाने की पूरी कोशिश भी करता हूँ, जिससे उनकी राह आसान हो सके।

 

प्र०10- प्रमोद जी, भोजपुरी फिल्मों का भविष्य आप कैसा देख रहे हैं?

उत्तर सच कहूं तो बहुत ही चिंताजनक है। असल में भोजपुरी में एल्बम की अपनी एक अलग ही दुनिया है, जिसमें अश्लील भड़कीले और गंदे गानों की भरमार है, जिसका कमोवेश असर भोजपुरी फिल्मों पर भी पड़ता है, क्योंकि अधिकतर वही वल्गर, भड़काऊ, तथ्यहीन गीत गाने वाले गायक आगे चलकर भोजपुरी फिल्मों में हीरो बन जाते हैं।  तत्पश्चात कमोबेश हर निर्माता उसकी पापुलरटी का फायदा उठाने के लालच में बेचारे निर्देशक से उसी गायक को लेकर फिल्म बनाने के लिए कहता है। इतना ही नहीं, वहीँ निर्माता हर वक्त प्रेशर भी बना कर रखता है कि, हीरो सफल है, लोकप्रिय है। इसलिए जिस तरह की चीजें वह सोच रहा है, वही सही हैं, चाहे-अनचाहे लगभग हर लेखक और निर्देशक को अपने सपनों के साथ-साथ एक बेहतर सिनेमा के साथ भी समझौता करना पड़ता है। स्थिति दिन-ब-दिन ऐसी हो गई है कि भोजपुरी का सच्चा और अच्छा दर्शक भोजपुरी सिनेमा से दूर हो गया है। बस कुछ वर्ग के दर्शकों के हाथों में भोजपुरी सिनेमा का भविष्य झूल रहा है, जिन्हें हम फर्स्टवेंचर कहते हैं। जबकि यही भोजपुरी इंडस्ट्री अच्छे लेखक अच्छे निर्देशक और अच्छे चरित्र अभिनेताओं से भरी पड़ी है, अगर कमी है तो समर्पित निर्माता की, अच्छे डिस्ट्रीब्यूटर की, और बढ़िया सिनेमा हाल की, जो चंद रुपयों की लालच के चलते अच्छे कथानक के साथ मराठी, तमिल, तेलुगू, मलयालम सिनेमा के जैसे बड़े कैनवास की भोजपुरी फिल्म बनावाने, बेचने, और डिस्ट्रीब्यूशन के अभाव में जी रहे हैं, जबकि भोजपुरी भाषी दाहकों की संख्या लगभग चालीस करोड़ से अधिक है..।

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