असम विधानसभा चुनाव के नतीजों का ऐलान हुए पांच दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस पर फैसला नहीं हो सका है। इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने न तो मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में सर्वानंद सोनोवाल के नाम का ऐलान किया था और न ही हेमंत बिस्व सरमा के नाम का। अन्य जिन राज्यों में चुनाव हुए थे, वहां पर मुख्यमंत्रियों ने शपथ ले ली है, लेकिन असम को अगले मुख्यमंत्री का इंतजार है। ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की सीएम के रूप में तीसरी बार बुधवार को शपथ ली थी, जबकि शुक्रवार को एमके स्टालिन ने तमिलनाडु के सीएम पद की शपथ ले ली। रविवार को असम के अगले मुख्यमंत्री का फैसला हो सकता है।
दिल्ली में बीजेपी लीडरशिप सर्वानंद
सोनोवाल और हिमंत बिस्व सरमा के बीच में चुनने में देरी दिखा रही है। दोनों ही मुख्यमंत्री
पद की रेस में हैं। बीजेपी नेतृत्व ने अभी तक केंद्रीय पर्यवेक्षकों को पार्टी के राज्य
पदाधिकारियों के साथ बातचीत करने के लिए असम नहीं भेजा है और नया सीएम चुनने के लिए
60 नवनिर्वाचित सदस्यों की कोई आधिकारिक बैठक भी नहीं हुई है। बीजेपी प्रवक्ता रूपम
गोस्वामी ने कहा, "अभी असम में पिछली
सरकार है, जोकि सही तरीके से काम कर रही है। पार्टी में कोई भी टकराव नहीं है और जल्द ही
सीएम पद के नाम की घोषणा भी हो जाएगी।"
असम में सरकार बनाने को लेकर देरी उस
समय हो रही है, जब राज्य में पिछले कुछ दिनों से कोरोना
वायरस के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। राज्य में गुरुवार को रिकॉर्ड 4,936 नए मामले सामने आए हैं। यह संख्या महामारी की शुरुआत के बाद से अब तक सबसे अधिक
है। गुरुवार को 46 लोगों की जान भी
संक्रमण के चलते चली गई। कांग्रेस के लोकसभा सांसद प्रद्युत का कहना है कि बीजेपी के
पास स्पष्ट बहुमत है, लेकिन फिर भी सरकार
नहीं बना पा रही है। खासतौर पर जब राज्य इतने मुश्किल के दौर से गुजर रहा है। बोर्ड
परीक्षाओं की तारीख, कोरोना संकट का फैसला
एड-हॉक सरकार पर नहीं छोड़ा जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि इस समय जरूरत थी कि कोरोना
के बढ़ते मामलों में खतरनाक उछाल और चाय-बागानों में फैलती बीमारी को रोकने के लिए
युद्धस्तर पर काम किया जाता। लेकिन हो रही देरी ने बीजेपी के फैसले लेने की प्रक्रिया
के दिवालियापान को उजागर कर दिया है।
