प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल ‘लांसेट’ ने मोदी सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए अपने एक संपादकीय में लिखा है कि भारत की सरकार महामारी से लड़ने के बजाय ट्विटर पर हो रही आलोचनाओं को बंद कराने में ज्यादा व्यस्त दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के बड़े अधिकारियों ने पहले ही कोरोना पर जीत घोषित कर दिया था, जिसमें खुद स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन भी शामिल हैं। हर्षवर्धन ने कहा था कि कोरोना का भारत में खात्मा हो चुका है।
संपादकीय में कहा गया, ‘सरकार
ने इस तरह के संकेत दिए कि कई महीनों तक कम केस आने के बाद भारत ने कोविड-19
को हरा दिया है, जबकि कोरोना के नए रूप और
दूसरी लहर आने को लेकर बार-बार चेतावनी दी जा रही थी।’ जर्नल
ने कहा कि तमाम चेतावनियों के बाद भी सरकार ने
राजनीतिक और धार्मिक रैलियों की इजाजत दी, जिसमें कोविड-19 नियमों
का खुला उल्लंघन किया गया।
लांसेट ने कहा, ‘कोविड-19 खत्म होने का मैसेज प्रसारित करने के चलते भारत में टीकाकरण अभियान भी धीमा हो गया। देश में अभी तक दो फीसदी से भी कम जनसंख्या को टीका लगाया गया है।’ लांसेट ने कहा कि अप्रैल तक सरकार की कोविड-19 टास्क फोर्स ने महीनों से कोई बैठक नहीं की है। इसका परिणाम हमारे सामने है। भारत को अब संकट से उबरने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।
