सामान्यतः बुखार, सर्दी, खांसी, बदन दर्द, अत्यधिक थकान, स्वाद-गंध लोप, भूख ना लगना और दस्त आदि कोरोना संक्रमण के प्राम्भिक लक्षण हैं। उत्तराखंड सरकार ने अपने स्वास्थ्य अमले को ऐसे लक्षण वाले व्यक्तियों की कोविड-19 की जांच रिपोर्ट की प्रत्याशा में 18 अप्रेल को उपचार शुरू करने का परामर्श दिया है। जिससे जांच रिपोर्ट के देर से मिलने की स्थिति में उपचार में विलम्ब ना हो।
कोरोना संक्रमण की जांच के लिए दो प्रकार के टेस्ट होते हैं: आरटी-पीसीआर और
एंटीजन टेस्ट। कई जगहों से शिकायतें आ रही हैं कि सभी लक्षण होने के बावजूद टेस्ट में
रिज़ल्ट निगेटिव आ रहे हैं। अब सवाल ये है कि इसके पीछे क्या कारण हैं?
आरटी-पीसीआर का मतलब है- रियल टाइम रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन।
इस टेस्ट में नाक या गले से एक नमूना (स्वाब) लिया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार,
आरटी-पीसीआर पुष्टि कर सकता है कि कोई व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित है या नहीं।
एक बार मरीज़ की नाक या गले से स्वाब लेने के बाद उसे एक तरल पदार्थ में डाला जाता
है। रूई पर लगा वायरस उस पदार्थ के साथ मिल जाता है और उसमें एक्टिव रहता है। फिर इस
नमूने को टेस्ट के लिए लैब में भेजा जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक़ आरटी पीसीआर परीक्षण कोरोना-संक्रमण के बारे में विश्वसनीय
परिणाम देता है। लेकिन, कभी-कभी ये 'फ़ॉल्स निगेटिव' भी देता है। मुंबई के वाशी के
फोर्टिस-हीरानंदानी अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन विभाग की निदेशक डॉ फराह इंगले कहती
हैं- "कुछ मरीज़ों में कोविड के सभी प्राथमिक लक्षण दिखते हैं लेकिन, रिज़ल्ट
निगेटिव आते हैं। मेडिकल भाषा में इसे फ़ॉल्स निगेटिव कहते हैं। यह ख़तरनाक हो सकता
है क्योंकि इससे रोगी आज़ाद होकर घूमने लगते हैं, उनका स्वयं का संक्रमण तो बढ़ता ही
है साथ ही वे और संक्रमण फैलाते हैं।"
डॉ फराह इंगले के अनुसार स्वाब लेने के दौरान चूक, स्वाब लेने का ग़लत तरीक़ा
,वायरस को सक्रिय रखने के लिए तरल पदार्थ की आवश्यक मात्रा में कम होना, स्वाब के नमूनों
का अनुचित ट्रांसपोर्टेशन आदि फ़ॉल्स निगेटिव आने की वजह हो सकते हैं। कभी-कभी मरीज़
के शरीर में वायरल लोड बहुत कम होता है, इसलिए लक्षणों के बावजूद निगेटिव रिपोर्ट आ
जाती है। डॉ इंगले कहती हैं- "अगर मरीज़ ने कोविड -19 परीक्षण से पहले पानी पिया
है या कुछ खाया है, तो यह आरटी-पीसीआर के परिणाम को प्रभावित कर सकता है।"
नवी मुंबई महानगर पालिका में एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट ने बताया- "कोरोना एक
राइबोन्यूक्लिक एसिड (आरएनए) वायरस का प्रकार है। यह एक बहुत ही संवेदनशील वायरस है,
जो किसी भी समय वाइटैलिटी (प्राण) खो सकता है। लिहाज़ा, कोल्ड-चेन को सही तरीके से
मैनेज करने की ज़रूरत है। यदि जांच के सैंपल के ट्रांसपोर्टेशन के दौरान वायरस सामान्य
तापमान के संपर्क में आता है, तो यह अपनी वाइटैलिटी खो देता है और रिपोर्ट निगेटिव
आ जाती है।" कभी-कभी स्वाब के नमूने लेने वाले लोग ठीक से प्रशिक्षित नहीं होते
हैं। वो स्वाब ठीक से नहीं लेते जिसके कारण ग़लत परिणाम आ जाते हैं।
केंद्र सरकार ने शुक्रवार (16 अप्रैल) को कहा कि आरटी-पीसीआर टेस्ट में म्यूटेड
वायरस के नहीं पकड़ में आने की संभावना कम है। हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के
मुताबिक़ केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने कहा- "भारत में आरटी-पीसीआर टेस्ट के लिए
इस्तेमाल की जाने वाली किट दो 'जीन' खोजने के लिए बनाई गई है। इसलिए, भले ही वायरस
में परिवर्तन हो गया हो, टेस्ट पर इसका असर नहीं पड़ेगा। इस परीक्षण की सटीकता और विशिष्टता
बरकरार है।" नवंबर में, राज्यसभा की संसदीय समिति ने फ़ॉल्स निगेटिव रिपोर्ट को
लेकर चिंता व्यक्त की थी, जिनके लिए ख़राब किट ज़िम्मेदार थे।