देशभर में कोरोना की दूसरी विनाशकारी लहर के बीच, जिसमें अस्पतालों में बिस्तर और मेडिकल सप्लाई के लिए लोगों में अफरा-तफरी मची है, कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अपनी ‘दूरदृष्टि और विज़न’ के लिए जी-23 सदस्यों, और उन पार्टी नेताओं के समूह से सराहना मिली है, जिन्होंने पिछले साल कांग्रेस में ‘नेतृत्व के शून्य’ पर सवाल उठाए थे।
पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले साल फरवरी में, महामारी से पहले ही कोविड-19 के ख़तरे की चेतावनी दी थी, जिसके बाद महामारी के दौरान वो इसके बारे में सार्वजनिक रूप से बयान देते रहे थे। राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लिखकर सुझाव दिया था कि टीकाकरण को हर किसी के लिए खोल दिया जाए, जिसे ‘उसकी ज़रूरत हो’, और विदेशी वैक्सीन्स भी भारत में उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इस पत्र के कुछ दिन बाद ही मोदी सरकार ने, विदेशों में निर्मित टीकों की आपात मंज़ूरी को, फास्ट-ट्रैक करने का निर्णय ले लिया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और जी-23 के सबसे मुखर सदस्यों में से एक, कपिल सिब्बल ने कहा कि कोविड के मामले में ‘राहुल गांधी ने बहुत समझदारी की बातें की हैं’, ‘वो एक अच्छे इंसान हैं, इसमें कोई शक नहीं है. उनके अंदर नकारात्मकता नहीं है। मोदी को इससे सीख लेनी चाहिए थी।'
सिब्बल ने पिछले साल आरोप लगाया था, कि कांग्रेस नेतृत्व आत्मविश्लेषण नहीं कर रहा है और मोदी सरकार के खिलाफ एक कारगर विपक्ष की भूमिका नहीं निभा पा रहा है। सिब्बल मोदी सरकार और महामारी से निपटने के इसके तरीक़ों की भी आलोचना करते रहे हैं।
जी-23 के एक और सदस्य, पूर्व कर्नाटक सीएम वीरप्पा मोइली ने कहा कि कोविड संकट के बीच गांधी एक ऐसे नेता बनकर उभरे हैं, ‘जिनके पास विज़न और दूरदृष्टि’ है। मोइली ने कहा- लोग बता सकते हैं कि राहुल ने जो कहा, वो बिल्कुल सही था। उन्होंने बहुत सी बातें पहले से बता दीं थीं, लेकिन बीजेपी ने उनका मज़ाक़ बनाया। उन्हें अब राहुल से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने बिल्कुल एक असली राजनीतिज्ञ की तरह बात की थी। यथास्थिति के बारे में तो हर कोई बात कर सकता है, लेकिन समय से पहले योजनाएं, कोई राजनीतिज्ञ ही बना सकता है।’
