एक था टाइगर, जो देश के लिए पाकिस्तान आर्मी में शामिल हुआ

पाक के मंसूबों को असफल करने के लिए भारत की इंटेलीजेंस एजेंसी रॉ यानी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग हर पल सक्रिय रहती है। ये एक ऐसे भारतीय जासूस की कहानी है, जो सिर्फ 23 साल की उम्र में भारत की सेवा के लिए पाक गया। वह पाक आर्मी में मेजर बना फिर कभी अपने वतन नहीं लौट सका। ये दास्ताँ है रॉ के जासूस रविंद्र कौशिक की है, जिसे शहादत के समय अपने वतन की मिट्टी भी नसीब नहीं हो सकी। दुश्मन के मुल्क में उन्होंने अपनी जान दी और वहीं पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

 


 

एक अंडरकवर एजेंट के तौर पर पाकिस्तान गए रविंद्र कौशिक का जन्म राजस्थान के श्रीगंगानगर में वर्ष 1952 में हुआ था। रविंद्र को थियेटर का काफी शौक था और नौजवान रविंद्र का रॉ के लिए चयन किया गया था। रॉ की ओर से उन्हें पाकिस्तान में भारत के लिए अंडरकवर एजेंट का जॉब ऑफर किया गया और सिर्फ बस 23 साल के रविंद्र एक मिशन पर पाकिस्तान रवाना हो गए। बताया जाता है कि रॉ ने उन्हें करीब दो वर्षों तक ट्रेनिंग दी थी।

 

कौशिक को दिल्ली में इस तरह से प्रशिक्षित किया गया था कि वो एक मुसलमान युवक नजर आएं। उन्हें उर्दू सिखाई गई और मुस्लिम धर्म से जुड़ी कुछ जरूरी बातों के बारे में भी बताया गया। उन्हें पाकिस्तान के बारे में भी कई जानकारियां दी गई। वह पहले से पंजाबी भाषा बोलने में माहिर थे, जिसे पाक के ज्यादातर हिस्सों में बोला जाता है। 1975 में उन्हें नबी अहमद शाकिर के नाम के साथ पाकिस्तान भेजा गया। इसके बाद वह बतौर सिविलियन क्लर्क पाकिस्तान सेना का हिस्सा बन गए। इसके बाद उन्हें पाक सेना के अकाउंट्स डिपार्टमेंट में भेज दिया गया। उन्होंने पाक जाकर इस्लाम धर्म कुबूल कर लिया। बताते हैं कि उन्होंने पाक जाकर आर्मी यूनिट में तैनात टेलर की बेटी अमानत से शादी कर ली। इसके बाद वह एक बेटे के पिता बने और उनके बेटे का निधन 2012-2013 के बीच हो गया।

 

वर्ष 1979 से 1983 के बीच वे कई अहम जानकारियां भारतीय सेना को देते रहे। उनकी तरफ से भेजी गई इंटेलीजेंस देश के बड़े काम आई थी। उनकी बहादुरी देखकर ही उनका नाम टाइगर भी पड़ गया था। उन्हें लोग ‘ब्लैक टाइगर’ के नाम से भी जानते थे। सितंबर 1983 में भारत ने जासूस इनायत मसीह को रविंदर कौशिक से संपर्क करने को कहा। लेकिन इसे पाक ने पकड़ लिया और उसने सारा सच उगल दिया। यह भी कहा जाता है कि कौशिक अपनी नहीं बल्कि रॉ की ही गलती की वजह से पकड़े गए।

 

कौशिक को वर्ष 1985 में पाक की अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में पाक सुप्रीम कोर्ट ने इस सजा को उम्रकैद में बदल दिया। उन्हें पाक की सियालकोट स्थित कोट लखपत और मियांवाली जेलों में करीब 16 वर्षों तक रखा गया। जेल में रहने की वजह से उन्हें टीबी, अस्थमा और दिल की बीमारियां हो गईं थीं। मौत के बाद उन्हें मुल्तान की सेंट्रल जेल में दफना दिया गया।

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